गर्मियों में लीची की खेती…क्यों है पैसा कमाने का सबसे ये सबसे सही तरीका?

लीची एक ऐसा फल है जो केवल गर्मियों में ही आता है. अप्रैल से जून तक इसका सीज़न चलता है और इस दौरान बाजारों में इसकी ज़बरदस्त मांग होती है. लोग लीची को ठंडक देने वाला फल मानते हैं, इसलिए गर्मी में हर कोई इसे खाना चाहता है. जब मांग ज़्यादा होती है तो दाम भी अच्छे मिलते हैं. यही वजह है कि लीची की खेती करने वाले किसानों को इस मौसम में मोटा मुनाफा होता है.

कम समय में ज्यादा कमाई का मौका

लीची का पेड़ अगर एक बार सही से लग जाए तो हर साल फल देने लगता है. इसका मतलब ये हुआ कि एक बार मेहनत करने के बाद हर साल कमाई होती रहेगी. एक पेड़ से 40 से 100 किलो तक लीची मिल सकती है. अगर बाजार में लीची की कीमत 60 से 100 रुपये प्रति किलो है, तो आप खुद ही सोचिए – एक पेड़ से कितनी कमाई हो सकती है. और अगर खेत में 100 से ज़्यादा पेड़ हों तो लाखों रुपये तक कमाने का मौका मिलता है.

गर्मी का मौसम लीची के लिए क्यों सही है

लीची को गर्म जलवायु बहुत पसंद है. 25 से 35 डिग्री सेल्सियस का तापमान इस फल के लिए बिल्कुल सही होता है. उत्तर भारत के राज्य जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल की जलवायु लीची के लिए अनुकूल मानी जाती है. लीची की फसल अप्रैल में पकने लगती है और जून तक बाजार में बिकती रहती है. ये वो समय होता है जब दूसरे फलों की उतनी मांग नहीं होती, और लीची हर जगह छा जाती है.

लीची के पेड़ को चाहिए खास देखभाल

लीची के पेड़ को बहुत ज़्यादा देखभाल की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन कुछ बातें ध्यान में रखना जरूरी है. सबसे पहले तो लीची के लिए दोमट मिट्टी (जिसमें पानी रुकता नहीं है) सबसे बढ़िया होती है. खेत की सही तैयारी, समय-समय पर सिंचाई और कीटों से बचाव जरूरी है. गर्मियों में जब तापमान बहुत बढ़ जाता है, तब पेड़ को पानी देना बहुत ज़रूरी हो जाता है. वरना फल झड़ सकते हैं या सूख सकते हैं.

बीमारी और कीटों से बचाना जरूरी

लीची की खेती में सबसे बड़ी दिक्कत होती है कीटों और बीमारियों से. जैसे-जैसे फल तैयार होने लगते हैं, उस पर मक्खियां और कीड़े हमला कर सकते हैं. कई बार फफूंद भी लग जाती है जिससे पूरा फल सड़ सकता है. इसलिए किसानों को जैविक उपाय या सही समय पर दवा छिड़काव करना चाहिए, जिससे फसल खराब न हो और फल ताज़ा और मीठा रहे.

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